👁️👁️बुझती थी प्यास जिन ठहाकों से
वही अक्स जाता नहीं आज आंखों से👀
न जाने ये समय कैसा गुजर रहा है
अपने हर बात से ये दिल मुकर रहा है
किसी की बेवफाई से होश आया है ऐसे
लगता है नशा मोहब्बत का धीरे धीरे उतर रहा है
😩😩😩
जितना मैं उसके करीब होते गया
मैं और भी गरीब होते गया
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तेरी जहरीली आंखों की चाल समझ न पाया
अपने ही किस्मत की काल समझ न पाया
लिपटकर जिस साये से हुआ दीवाना
है वो बेवफा का जाल, समझ न पाया
😩😩😩
शराब के नशे से नहीं जिन्दगी तबाह हुई
मोहब्बत के नशे से
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किस्मत को न जाने क्या मुझ पर भाया
बेवफाई उसने की और इल्जाम मुझ पर आया
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जिसको जिन्दगी से भी ज्यादा प्यार किया
उसने ही अपनी जिन्दगी से दरकिनार किया
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सारी जिन्दगी तेरी गुजरे जन्नतों में
यही मांगता हूं मैं अपने मन्नतों में
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जब तू आई थी जिंदगी में न जाने कितने फूल खिले थे
आज तन्हाई में सोचता है ये दिल कि हम क्यों ही मिले थे
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