लता दी ऐसी एक गायिका थीं- कविता
एक गायिका परिचय की मोहताज नहीं
हुआ है न होगी ऐसी आवाज कहीं
हर तरफ बिखरा पड़ा है उनका गीत
याद रहेगा सबको ये अतीत
गले में उनके मां सरस्वती की वास थी
उनके हर गीत में एक अलग मिठास थी
हर होंठ गुनगुनाएंगे उनके गाने सदियों तक
सुरीली हवा बहती रहेगी गलियों-कलियों घाटी- वादियों तक
गायिकी की कला से सृजित थीं
वो अनेकों पुरुष्कारों से पुरुष्कृत थीं
भारत की वो स्वर कोकिला थीं
लता दी ऐसी एक गायिका थीं